अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि बिधि आइ बिलोकी बेनी। सुमिरत सकल सुमंगल देनी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइस प्रकार श्रीरामने आकर त्रिवेणीका दर्शन किया, जो स्मरण करनेसे ही सब सुन्दर मङ्गलोंको देनेवाली है। फिर आनन्दपूर्वक [त्रिवेणीमें] स्नान करके शिवजीकी सेवा (पूजा) की और विधिपूर्वक तीर्थदेवताओंका पूजन किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 431 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि बिधि आइ बिलोकी बेनी। सुमिरत सकल सुमंगल देनी।।
मुदित नहाइ कीन्हि सिव सेवा। पुजि जथाबिधि तीरथ देवा।।
स्रोत अभिलेख 2.106 · पुस्तक पृ. 431, 432
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एहि बिधि आइ बिलोकी बेनी। सुमिरत सकल सुमंगल देनी।।
English explanation
Arriving in this way, Rama beheld the Triveni, which bestows every auspicious blessing when remembered.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | रीति से | in this manner |
| आइ | आकर | having arrived |
| बिलोकी | देखी; दर्शन किया | beheld |
| बेनी | त्रिवेणी; तीन नदियों का संगम | the Triveni, confluence of three rivers |
| सुमिरत | स्मरण करने पर | when remembered |
| सकल | सभी | all |
| सुमंगल | शुभ मंगल | auspicious blessings |
| देनी | देने वाली | bestowing |
2 मुदित नहाइ कीन्हि सिव सेवा। पुजि जथाबिधि तीरथ देवा।।
English explanation
Rama bathed joyfully, worshipped Shiva, and duly worshipped the deity of the sacred place.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| नहाइ | स्नान करके | having bathed |
| कीन्हि | की | performed |
| सिव | भगवान शिव की | of Lord Shiva |
| सेवा | सेवा; पूजा | devotional service; worship |
| पुजि | पूजन करके | having worshipped |
| जथाबिधि | निर्धारित विधि के अनुसार | according to the prescribed rite |
| तीरथ | तीर्थ के | of the sacred place |
| देवा | देवता को | the deity |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.106
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 431
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 431, 432
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