अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एतना कहत नीति रस भूला। रन रस बिटपु पुलक मिस फूला।।
मूल पाठ
एतना कहत नीति रस भूला। रन रस बिटपु पुलक मिस फूला।।
प्रभु पद बंदि सीस रज राखी। बोले सत्य सहज बलु भाषी।।
स्रोत अभिलेख 2.229 · पुस्तक पृ. 534, 535
भावार्थ
मूल पाठ के बादइतना कहते ही लक्ष्मणजी नीतिरस भूल गये और युद्धरसरूपी वृक्ष पुलकावलीके बहानेसे फूल उठा (अर्थात् नीतिकी बात कहते-कहते उनके शरीरमें वीर-रस छा गया)। वे प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके चरणोंकी वन्दना करके, चरण-रजको सिरपर रखकर सच्चा और स्वाभाविक बल कहते हुए बोले॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 534 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एतना कहत नीति रस भूला। रन रस बिटपु पुलक मिस फूला।।
English explanation
While saying this, Lakshmana forgot the pleasure of discussing policy; the tree of martial ardor blossomed in the form of goosebumps.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एतना | इतना | this much |
| कहत | कहते हुए | while saying |
| नीति | नीति; विवेकपूर्ण व्यवहार | policy; prudent conduct |
| रस | रस; रुचि | relish; pleasure |
| भूला | भूल गए | forgot |
| रन | युद्ध | battle |
| रस | उत्साह; वीरता का रस | ardor; martial exhilaration |
| बिटपु | वृक्ष | tree |
| पुलक | रोमांच; रोंगटे खड़े होना | goosebumps; bristling hairs |
| मिस | के रूप में; के बहाने | in the form of; under the guise of |
| फूला | खिल उठा | blossomed |
2 प्रभु पद बंदि सीस रज राखी। बोले सत्य सहज बलु भाषी।।
English explanation
After bowing at Lord Rama’s feet and placing their dust on his head, Lakshmana spoke, truthfully describing his innate strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| पद | चरण | feet |
| बंदि | वंदना करके; प्रणाम करके | having bowed to |
| सीस | सिर पर | on the head |
| रज | चरणों की धूल | dust of the feet |
| राखी | रखकर | having placed |
| बोले | बोले | spoke |
| सत्य | सच-सच | truthfully |
| सहज | स्वाभाविक; जन्मजात | natural; innate |
| बलु | बल; शक्ति | strength |
| भाषी | कहते हुए; वर्णन करके | stating; describing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.229
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 534
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 534, 535
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।