अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक कीन्हि नहिं भरत भलाई। निदरे रामु जानि असहाई।।
मूल पाठ
एक कीन्हि नहिं भरत भलाई। निदरे रामु जानि असहाई।।
समुझि परिहि सोउ आजु बिसेषी। समर सरोष राम मुखु पेखी।।
स्रोत अभिलेख 2.229 · पुस्तक पृ. 534, 535
भावार्थ
मूल पाठ के बादहाँ, भरतने एक बात अच्छी नहीं की, जो रामजी (आप) को असहाय जानकर उनका निरादर किया! पर आज संग्राममें श्रीरामजी (आप) का क्रोधपूर्ण मुख देखकर यह बात भी उनकी समझमें विशेषरूपसे आ जायगी (अर्थात् इस निरादरका फल भी वे अच्छी तरह पा जायँगे)॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 534 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 एक कीन्हि नहिं भरत भलाई। निदरे रामु जानि असहाई।।
English explanation
But Bharata has done one thing wrong: he has slighted Rama, thinking him without support.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक बात | one thing |
| कीन्हि | की | did |
| नहिं | नहीं | not |
| भरत | राम के भाई भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| भलाई | अच्छा काम; उचित व्यवहार | a good deed; proper conduct |
| निदरे | अनादर किया; तुच्छ समझा | slighted; treated with contempt |
| रामु | राम को | Rama |
| जानि | समझकर | considering; taking to be |
| असहाई | सहायता या सहारे से रहित | without help or support |
2 समुझि परिहि सोउ आजु बिसेषी। समर सरोष राम मुखु पेखी।।
English explanation
Today, on seeing Rama’s angry face in battle, he will understand that point especially clearly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| समुझि | समझ में | understood |
| परिहि | आ जाएगी | will become; will dawn |
| सोउ | वह बात भी | that too |
| आजु | आज | today |
| बिसेषी | विशेष रूप से; अच्छी तरह | especially; clearly |
| समर | युद्ध में | in battle |
| सरोष | क्रोधयुक्त | angry; wrathful |
| राम | राम का | Rama’s |
| मुखु | मुख; चेहरा | face |
| पेखी | देखकर | on seeing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.229
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 534
- सहायक विषय
- श्रीसीताजीका स्वप्न, श्रीरामजीको कोल-किरातोंद्वारा भरतजीके आगमनकी सूचना, रामजीका शोक, लक्ष्मणजीका क्रोध
- मुद्रित पृष्ठ
- 534, 535
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।