अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आन उपाउ मोहि नहि सूझा। को जिय कै रघुबर बिनु बूझा।।
मूल पाठ
आन उपाउ मोहि नहि सूझा। को जिय कै रघुबर बिनु बूझा।।
एकहिं आँक इहइ मन माहीं। प्रातकाल चलिहउँ प्रभु पाहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.183 · पुस्तक पृ. 495, 495
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुझे दूसरा कोई उपाय नहीं सूझता। श्रीरामजीके बिना मेरे हृदयकी बात कौन जान सकता है? मनमें एक ही आँक (निश्चयपूर्वक) यही है कि प्रात:काल प्रभु श्रीरामजीके पास चल दूँगा॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 495 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आन उपाउ मोहि नहि सूझा। को जिय कै रघुबर बिनु बूझा।।
English explanation
AI-generated interpretation draft: No other course occurs to me. Who but Rama understands what is in my heart?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आन | दूसरा | other |
| उपाउ | उपाय | course of action |
| मोहि | मुझे | to me |
| नहि | नहीं | not |
| सूझा | सूझा | occurred |
| को | कौन | who |
| जिय | हृदय | heart |
| कै | की बात | what is in |
| रघुबर | रघुकुल में श्रेष्ठ राम | Rama, foremost of Raghu’s lineage |
| बिनु | बिना | without; except |
| बूझा | समझता है | understands |
2 एकहिं आँक इहइ मन माहीं। प्रातकाल चलिहउँ प्रभु पाहीं।।
English explanation
There is just this one firm resolve in my mind: at dawn I shall go to Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एकहिं | एक ही | just one |
| आँक | पक्का निश्चय | firm resolve |
| इहइ | यही | this very thing |
| मन | मन | mind |
| माहीं | में | in |
| प्रातकाल | सुबह | at dawn |
| चलिहउँ | मैं चलूँगा | I shall go |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| पाहीं | के पास | to; into the presence of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.183
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 495
- सहायक विषय
- वसिष्ठ-भरत-संवाद, श्रीरामजीको लानेके लिये चित्रकूट जानेकी तैयारी
- मुद्रित पृष्ठ
- 495, 495
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।