अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आगे रामु लखनु बने पाछें। तापस बेष बिराजत काछें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआगे श्रीरामजी हैं, पीछे लक्ष्मणजी सुशोभित हैं। तपस्वियोंके वेष बनाये दोनों बड़ी ही शोभा पा रहे हैं। दोनोंके बीचमें सीताजी कैसी सुशोभित हो रही हैं, जैसे ब्रह्म और जीवके बीचमें माया!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 445 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
आगे रामु लखनु बने पाछें। तापस बेष बिराजत काछें।।
उभय बीच सिय सोहति कैसे। ब्रह्म जीव बिच माया जैसे।।
स्रोत अभिलेख 2.123 · पुस्तक पृ. 445, 446
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 आगे रामु लखनु बने पाछें। तापस बेष बिराजत काछें।।
English explanation
Rama is ahead and Lakshmana behind; both look splendid in ascetic dress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आगे | आगे | in front |
| रामु | राम | Rama |
| लखनु | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| बने | सुशोभित हैं | are splendidly placed |
| पाछें | पीछे | behind |
| तापस | तपस्वी का | ascetic |
| बेष | वेश | dress |
| बिराजत | शोभा पा रहे हैं | look splendid |
| काछें | पहनावे में | in their attire |
2 उभय बीच सिय सोहति कैसे। ब्रह्म जीव बिच माया जैसे।।
English explanation
Between the two, Sita shines like Maya between Brahman and the individual soul.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उभय | दोनों के | of the two |
| बीच | बीच | between |
| सिय | सीता, राम की पत्नी | Sita, Rama’s wife |
| सोहति | शोभित हैं | shines |
| कैसे | किस प्रकार—ऐसे | in what way—thus |
| ब्रह्म | परम तत्त्व ब्रह्म | Brahman, the absolute reality |
| जीव | व्यक्तिगत आत्मा | the individual soul |
| बिच | बीच | between |
| माया | माया, जगत प्रकट करने वाली शक्ति | Maya, the power of manifestation |
| जैसे | जैसे | just as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.123
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 445
- सहायक विषय
- यमुनाको प्रणाम, वनवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 445, 446
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।