अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस बिचारि नहिं कीजअ रोसू। काहुहि बादि न देइअ दोसू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दऐसा विचारकर क्रोध नहीं करना चाहिये और न किसीको व्यर्थ दोष ही देना चाहिये। सब लोग मोहरूपी रात्रिमें सोनेवाले हैं और सोते हुए उन्हें अनेकों प्रकारके स्वप्न दिखायी देते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 420 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अस बिचारि नहिं कीजअ रोसू। काहुहि बादि न देइअ दोसू।।
मोह निसाँ सबु सोवनिहारा। देखिअ सपन अनेक प्रकारा।।
स्रोत अभिलेख 2.93 · पुस्तक पृ. 420, 421
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस बिचारि नहिं कीजअ रोसू। काहुहि बादि न देइअ दोसू।।
English explanation
Reflecting thus, one should not become angry or blame anyone without cause.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| नहिं | नहीं | not |
| कीजअ | करना चाहिए | one should do |
| रोसू | क्रोध | anger |
| काहुहि | किसी को | to anyone |
| बादि | व्यर्थ; बिना कारण | without cause |
| न | नहीं | not |
| देइअ | देना चाहिए | one should assign |
| दोसू | दोष | blame |
2 मोह निसाँ सबु सोवनिहारा। देखिअ सपन अनेक प्रकारा।।
English explanation
In the night of delusion, everyone is asleep, and dreams of many kinds are seen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोह | मोह की | of delusion |
| निसाँ | रात में | in the night |
| सबु | सब; सभी | everyone |
| सोवनिहारा | सोने वाले | asleep; sleepers |
| देखिअ | दिखाई देते हैं | are seen |
| सपन | सपने | dreams |
| अनेक | अनेक | many |
| प्रकारा | प्रकार के | of various kinds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.93
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 420
- सहायक विषय
- लक्ष्मण-निषाद-संवाद, श्रीराम-सीतासे सुमन्त्रका संवाद, सुमन्त्रका लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 420, 421
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।