अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अलिगन गावत नाचत मोरा। जनु सुराज मंगल चहु ओरा।।
मूल पाठ
अलिगन गावत नाचत मोरा। जनु सुराज मंगल चहु ओरा।।
बेलि बिटप तृन सफल सफूला। सब समाजु मुद मंगल मूला।।
स्रोत अभिलेख 2.236 · पुस्तक पृ. 540, 540
भावार्थ
मूल पाठ के बादभौंरोंके समूह गुंजार कर रहे हैं और मोर नाच रहे हैं। मानो उस अच्छे राज्यमें चारों ओर मङ्गल हो रहा है। बेल, वृक्ष, तृण सब फल और फूलोंसे युक्त हैं। सारा समाज आनन्द और मङ्गलका मूल बन रहा है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 540 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अलिगन गावत नाचत मोरा। जनु सुराज मंगल चहु ओरा।।
English explanation
Swarms of bees sing and peacocks dance, as though celebrations of good rule filled every direction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अलिगन | भौंरों के समूह | swarms of bees |
| गावत | गाते हैं | sing |
| नाचत | नाचते हैं | dance |
| मोरा | मोर | peacocks |
| जनु | मानो | as though |
| सुराज | अच्छा शासन | good rule |
| मंगल | मंगल-उत्सव | auspicious celebrations |
| चहु | चारों | all four |
| ओरा | ओर | directions |
2 बेलि बिटप तृन सफल सफूला। सब समाजु मुद मंगल मूला।।
English explanation
Creepers, trees, and grasses bear fruit and flowers; the entire assemblage is a source of joy and auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बेलि | लताएँ | creepers |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| तृन | घास | grasses |
| सफल | फलों से युक्त | fruit-bearing |
| सफूला | फूलों से युक्त | flowering |
| सब | समस्त | entire |
| समाजु | समुदाय | assemblage |
| मुद | आनंद | joy |
| मंगल | मंगल; शुभता | auspiciousness |
| मूला | स्रोत | source |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.236
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 540
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 540, 540
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।