अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अमर नाग किंनर दिसिपाला। चित्रकूट आए तेहि काला।।
मूल पाठ
अमर नाग किंनर दिसिपाला। चित्रकूट आए तेहि काला।।
राम प्रनामु कीन्ह सब काहू। मुदित देव लहि लोचन लाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.134 · पुस्तक पृ. 455, 456
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस समय देवता, नाग, किन्नर और दिक्पाल चित्रकूटमें आये और श्रीरामचन्द्रजीने सब किसीको प्रणाम किया। देवता नेत्रोंका लाभ पाकर आनन्दित हुए॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 455 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अमर नाग किंनर दिसिपाला। चित्रकूट आए तेहि काला।।
English explanation
The gods, serpent beings, celestial kinnara beings, and guardians of the directions came to Chitrakoot at that time.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अमर | देवता | gods |
| नाग | नाग जाति के दिव्य प्राणी | divine serpent beings |
| किंनर | किन्नर नामक दिव्य प्राणी | celestial kinnara beings |
| दिसिपाला | दिशाओं के रक्षक देवता | guardian deities of the directions |
| चित्रकूट | चित्रकूट में | to Chitrakoot |
| आए | आए | came |
| तेहि | उस | that |
| काला | समय | time |
2 राम प्रनामु कीन्ह सब काहू। मुदित देव लहि लोचन लाहू।।
English explanation
Rama bowed to them all. The gods rejoiced, their eyes rewarded by the sight of him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम ने | Rama |
| प्रनामु | प्रणाम | a respectful bow |
| कीन्ह | किया | made |
| सब | सभी | all |
| काहू | को | to them |
| मुदित | प्रसन्न | delighted |
| देव | देवता | the gods |
| लहि | पाकर | having obtained |
| लोचन | नेत्रों का | of their eyes |
| लाहू | लाभ; दर्शन का फल | reward through seeing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.134
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 455
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 455, 456
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।