अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति आरति सब पूँछहिं रानी। उतरु न आव बिकल भइ बानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअत्यन्त आर्त होकर सब रानियाँ पूछती हैं; पर सुमन्त्रको कुछ उत्तर नहीं आता, उनकी वाणी विकल हो गयी (रुक गयी) है। न कानोंसे सुनायी पड़ता है और न आँखोंसे कुछ सूझता है। वे जो भी सामने आता है उस-उससे पूछते हैं—कहो, राजा कहाँ हैं?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 466 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति आरति सब पूँछहिं रानी। उतरु न आव बिकल भइ बानी।।
सुनइ न श्रवन नयन नहिं सूझा। कहहु कहाँ नृप तेहि तेहि बूझा।।
स्रोत अभिलेख 2.148 · पुस्तक पृ. 466, 467
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अति आरति सब पूँछहिं रानी। उतरु न आव बिकल भइ बानी।।
English explanation
AI draft: All the queens ask in great distress; Sumantra cannot answer, his speech overcome by agitation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | अत्यंत | extremely |
| आरति | व्याकुलता में | in distress |
| सब | सभी | all |
| पूँछहिं | पूछती हैं | ask |
| रानी | रानियाँ | queens |
| उतरु | उत्तर | answer |
| न | नहीं | not |
| आव | आता है | comes forth |
| बिकल | व्याकुल | agitated |
| भइ | हो गई | became |
| बानी | वाणी | speech |
2 सुनइ न श्रवन नयन नहिं सूझा। कहहु कहाँ नृप तेहि तेहि बूझा।।
English explanation
Sumantra's ears do not hear and his eyes discern nothing; he asks everyone he encounters, “Tell me, where is the king?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनइ | सुनते हैं | hear |
| न | नहीं | not |
| श्रवन | कान | ears |
| नयन | आँखों को | to the eyes |
| नहिं | नहीं | not |
| सूझा | दिखाई देता | is discernible |
| कहहु | बताओ | tell me |
| कहाँ | कहाँ | where |
| नृप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| तेहि | उस-उस से | each person |
| तेहि | उससे भी | each one in turn |
| बूझा | पूछा | asked |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.148
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 466
- सहायक विषय
- सुमन्त्रका अयोध्याको लौटना और सर्वत्र शोक देखना
- मुद्रित पृष्ठ
- 466, 467
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।