अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अंब एक दुखु मोहि बिसेषी। निपट बिकल नरनायकु देखी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे माता! मुझे एक ही दु:ख विशेषरूपसे हो रहा है, वह महाराजको अत्यन्त व्याकुल देखकर। इस थोड़ी-सी बातके लिये ही पिताजीको इतना भारी दु:ख हो, हे माता! मुझे इस बातपर विश्वास नहीं होता॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 378 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अंब एक दुखु मोहि बिसेषी। निपट बिकल नरनायकु देखी।।
थोरिहिं बात पितहि दुख भारी। होति प्रतीति न मोहि महतारी।।
स्रोत अभिलेख 2.42 · पुस्तक पृ. 378, 379
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अंब एक दुखु मोहि बिसेषी। निपट बिकल नरनायकु देखी।।
English explanation
Mother, one thing especially grieves me: seeing the king utterly distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अंब | हे माँ | O mother |
| एक | एक | one |
| दुखु | दुःख | grief |
| मोहि | मुझे | to me |
| बिसेषी | विशेष रूप से | especially |
| निपट | अत्यंत | utterly |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| नरनायकु | राजा दशरथ को | King Dasharatha |
| देखी | देखकर | on seeing |
2 थोरिहिं बात पितहि दुख भारी। होति प्रतीति न मोहि महतारी।।
English explanation
Mother, I cannot believe that so small a matter is causing Father such great sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| थोरिहिं | इतनी थोड़ी-सी | so small a |
| बात | बात से | matter causing |
| पितहि | पिता को | to Father |
| दुख | दुःख | sorrow |
| भारी | बहुत बड़ा | great |
| होति | होता है | arises |
| प्रतीति | विश्वास | belief |
| न | नहीं | not |
| मोहि | मुझे | in me |
| महतारी | हे माता | O mother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 378
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 378, 379
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।