अरण्यकाण्ड · सोरठा · सोरठा
उमा राम गुन गूढ़ पंडित मुनि पावहिं बिरति।
मूल पाठ
उमा राम गुन गूढ़ पंडित मुनि पावहिं बिरति।
पावहिं मोह बिमूढ़ जे हरि बिमुख न धर्म रति॥
स्रोत अभिलेख मंगलाचरण · पुस्तक पृ. 619, 620
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पार्वती! श्रीरामजीके गुण गूढ़ हैं, पण्डित और मुनि उन्हें समझकर वैराग्य प्राप्त करते हैं। परन्तु जो भगवान्से विमुख हैं और जिनका धर्ममें प्रेम नहीं है, वे महामूढ़ [उन्हें सुनकर] मोहको प्राप्त होते हैं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 620 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1उमा राम गुन गूढ़ पंडित मुनि पावहिं बिरति।
English explanation
O Uma, Rama’s qualities are profound; learned people and sages gain detachment through them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| राम | श्रीराम के | of Lord Rama |
| गुन | गुण | qualities |
| गूढ़ | गहरे; रहस्यमय | profound; mysterious |
| पंडित | विद्वान | learned people |
| मुनि | मननशील ऋषि | contemplative sages |
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | obtain |
| बिरति | वैराग्य; आसक्ति से निवृत्ति | detachment; freedom from attachment |
2पावहिं मोह बिमूढ़ जे हरि बिमुख न धर्म रति॥
English explanation
But those who are deeply deluded, turned away from the Lord, and without love for righteousness acquire delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पावहिं | प्राप्त करते हैं | obtain |
| मोह | मोह; भ्रमपूर्ण आसक्ति | delusion; confused attachment |
| बिमूढ़ | अत्यंत अज्ञानी या भ्रमित | deeply ignorant or deluded |
| जे | जो लोग | those who |
| हरि | भगवान हरि से | from the Lord, Hari |
| बिमुख | विमुख; मुँह मोड़े हुए | turned away |
| न | नहीं | not; without |
| धर्म | धर्म में | in righteousness |
| रति | प्रेम; अनुराग | love; attachment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- सोरठा
- स्रोत अभिलेख
- मंगलाचरण
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 620
- सहायक विषय
- मंगलाचरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 619, 620
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