अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुर नर भरत प्रीति मैं गाई। मति अनुरूप अनूप सुहाई।।
मूल पाठ
पुर नर भरत प्रीति मैं गाई। मति अनुरूप अनूप सुहाई।।
अब प्रभु चरित सुनहु अति पावन। करत जे बन सुर नर मुनि भावन।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 620, 620
भावार्थ
मूल पाठ के बादपुरवासियोंके और भरतजीके अनुपम और सुन्दर प्रेमका मैंने अपनी बुद्धिके अनुसार गान किया। अब देवता, मनुष्य और मुनियोंके मनको भानेवाले प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके वे अत्यन्त पवित्र चरित्र सुनो, जिन्हें वे वनमें कर रहे हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 620 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुर नर भरत प्रीति मैं गाई। मति अनुरूप अनूप सुहाई।।
English explanation
I have sung of the incomparable, beautiful love of the townspeople and Bharata, according to my understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुर | नगर के | of the city |
| नर | लोगों की | the people's |
| भरत | भरत की, श्रीराम के भाई की | of Bharata, Rama's brother |
| प्रीति | प्रेम-भावना | love |
| मैं | मैंने | I |
| गाई | गाकर वर्णन किया | sang of |
| मति | अपनी बुद्धि के | my understanding |
| अनुरूप | अनुसार | according to |
| अनूप | अनुपम | incomparable |
| सुहाई | सुंदर और मनोहर | beautiful and delightful |
2 अब प्रभु चरित सुनहु अति पावन। करत जे बन सुर नर मुनि भावन।।
English explanation
Now hear the Lord's most sacred deeds, which he performs in the forest and which delight gods, humans, and sages.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम के | of Lord Rama |
| चरित | चरित, कार्य | deeds |
| सुनहु | सुनो | listen |
| अति | अत्यंत | most |
| पावन | पवित्र करने वाले | purifying |
| करत | करते हैं | performs |
| जे | जो | which |
| बन | वन में | in the forest |
| सुर | देवताओं को | to gods |
| नर | मनुष्यों को | to humans |
| मुनि | मुनियों को | to sages |
| भावन | प्रिय लगने वाले | pleasing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 620
- सहायक विषय
- जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 620, 620
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।