अरण्यकाण्ड · दोहा 29 (क) · दोहा/सोरठा
हारि परा खल बहु बिधि भय अरु प्रीति देखाइ।
हारि परा खल बहु बिधि भय अरु प्रीति देखाइ।
तब असोक पादप तर राखिसि जतन कराइ।।29(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.29 · पुस्तक पृ. 658, 660
भावार्थ और शब्दार्थ
अर्थ उपलब्ध नहींइस पद के शब्दार्थ अभी उपलब्ध नहीं हैं। मूल पाठ और स्रोत-प्रसंग नीचे दिए गए हैं।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1हारि परा खल बहु बिधि भय अरु प्रीति देखाइ।
इस पंक्ति का अर्थ अभी उपलब्ध नहीं है।
2 तब असोक पादप तर राखिसि जतन कराइ।।29(क)।।
इस पंक्ति का अर्थ अभी उपलब्ध नहीं है।
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 29 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 3.29
- सहायक विषय
- जटायु-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 658, 660
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।