अरण्यकाण्ड · दोहा 42 (क) · दोहा/सोरठा
राका रजनी भगति तव राम नाम सोइ सोम।
राका रजनी भगति तव राम नाम सोइ सोम।
अपर नाम उडगन बिमल बसुहुँ भगत उर ब्योम।।42(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.42 · पुस्तक पृ. 674, 675
भावार्थ और शब्दार्थ
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1राका रजनी भगति तव राम नाम सोइ सोम।
आपकी भक्ति पूर्णिमा की रात है और ‘राम’ नाम उसमें चंद्रमा है।
English explanation
Devotion to you is the full-moon night, and the name ‘Rama’ is its moon.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राका | पूर्णिमा | full moon |
| रजनी | रात | night |
| भगति | भक्ति | devotion |
| तव | आपकी; आपके प्रति | your; directed to you |
| राम | राम | Rama |
| नाम | नाम | name |
| सोइ | वही | that very |
| सोम | चंद्रमा | moon |
2 अपर नाम उडगन बिमल बसुहुँ भगत उर ब्योम।।42(क)।।
अन्य नाम निर्मल तारों के समूह हैं; वे भक्तों के हृदयरूपी आकाश में बसें।
English explanation
The other names are a host of pure stars; may they dwell in the sky of devotees’ hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अपर | अन्य | other |
| नाम | नाम | names |
| उडगन | तारों का समूह | host of stars |
| बिमल | निर्मल | pure |
| बसुहुँ | बसें | may they dwell |
| भगत | भक्तों के | devotees’ |
| उर | हृदय | hearts |
| ब्योम | आकाश में | in the sky |
| क | पद्य-संदर्भ चिह्न (क) | verse reference marker (क) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 42 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 3.42
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 674, 675
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