अरण्यकाण्ड · दोहा 42 (ख) · दोहा/सोरठा
एवमस्तु मुनि सन कहेउ कृपासिंधु रघुनाथ।
एवमस्तु मुनि सन कहेउ कृपासिंधु रघुनाथ।
तब नारद मन हरष अति प्रभु पद नायउ माथ।।42(ख)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.42 · पुस्तक पृ. 674, 675
भावार्थ और शब्दार्थ
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1 एवमस्तु मुनि सन कहेउ कृपासिंधु रघुनाथ।
कृपा के सागर रघुनाथ ने मुनि से कहा: ऐसा ही हो।
English explanation
Rama, lord of Raghu’s line and ocean of compassion, said to the sage: So be it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एवमस्तु | ऐसा ही हो | so be it |
| मुनि | मुनि नारद | the sage Narada |
| सन | से | to |
| कहेउ | कहा | said |
| कृपासिंधु | कृपा के सागर | ocean of compassion |
| रघुनाथ | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
2 तब नारद मन हरष अति प्रभु पद नायउ माथ।।42(ख)।।
तब नारद के मन में अत्यंत हर्ष हुआ और उन्होंने प्रभु के चरणों में सिर झुकाया।
English explanation
Then Narada’s heart filled with great joy, and he bowed his head at the Lord’s feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| नारद | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| मन | मन में | in the heart |
| हरष | हर्ष | joy |
| अति | अत्यंत | great |
| प्रभु | प्रभु के | the Lord’s |
| पद | चरणों में | at the feet |
| नायउ | झुकाया | bowed |
| माथ | सिर | head |
| ख | पद्य-संदर्भ चिह्न (ख) | verse reference marker (ख) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 42 (ख)
- स्रोत अभिलेख
- 3.42
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 674, 675
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