अरण्यकाण्ड · दोहा 40 · दोहा/सोरठा
फल भारन नमि बिटप सब रहे भूमि निअराइ।
फल भारन नमि बिटप सब रहे भूमि निअराइ।
पर उपकारी पुरुष जिमि नवहिं सुसंपति पाइ।।40।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 672, 673
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1फल भारन नमि बिटप सब रहे भूमि निअराइ।
फलों के भार से झुककर सभी वृक्ष पृथ्वी के निकट हो रहे हैं।
English explanation
Bent under the weight of their fruit, all the trees hang close to the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फल | फलों के | of fruit |
| भारन | भार से | under the weight |
| नमि | झुककर | having bent |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| सब | सभी | all |
| रहे | हो रहे हैं | remain |
| भूमि | पृथ्वी के | to the ground |
| निअराइ | निकट आकर | drawn close |
2 पर उपकारी पुरुष जिमि नवहिं सुसंपति पाइ।।40।।
जैसे दूसरों का उपकार करने वाले पुरुष अच्छी संपत्ति पाकर विनम्र हो जाते हैं।
English explanation
Just as people who benefit others become humble on acquiring ample prosperity.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों का | others |
| उपकारी | उपकार करने वाले | benefiting |
| पुरुष | व्यक्ति | people |
| जिमि | जैसे | just as |
| नवहिं | झुकते हैं; विनम्र होते हैं | bow; become humble |
| सुसंपति | अच्छी, प्रचुर संपत्ति | ample prosperity |
| पाइ | पाकर | having obtained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 40
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 672, 673
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।