अरण्यकाण्ड · दोहा 39 (क) · दोहा/सोरठा
पुरइनि सबन ओट जल बेगि न पाइअ मर्म।
पुरइनि सबन ओट जल बेगि न पाइअ मर्म।
मायाछन्न न देखिऐ जैसे निर्गुन ब्रह्म।।39(क)।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.39 · पुस्तक पृ. 671, 672
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1पुरइनि सबन ओट जल बेगि न पाइअ मर्म।
कमल-पत्तों की ओट में जल का वास्तविक स्वरूप तुरंत नहीं जाना जा सकता; ‘सबन’ का पाठ कुछ अनिश्चित है।
English explanation
Hidden by lotus leaves, the water's true nature cannot readily be discerned; the reading ‘सबन’ is somewhat uncertain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुरइनि | कमल के पत्ते | lotus leaves |
| सबन | सबकी | of all |
| ओट | आड़ में | under cover |
| जल | जल का | of the water |
| बेगि | शीघ्र; तुरंत | quickly; readily |
| न | नहीं | not |
| पाइअ | जाना जा सकता | can be discerned |
| मर्म | वास्तविक स्वरूप | true nature |
2 मायाछन्न न देखिऐ जैसे निर्गुन ब्रह्म।।39(क)।।
जैसे माया से ढका निर्गुण ब्रह्म दिखाई नहीं देता।
English explanation
Just as Brahman beyond qualities, veiled by maya, is not seen.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मायाछन्न | माया से ढका हुआ | veiled by maya |
| न | नहीं | not |
| देखिऐ | दिखाई देता | is seen |
| जैसे | जिस प्रकार | just as |
| निर्गुन | गुणों से परे | beyond qualities |
| ब्रह्म | ब्रह्म, परम सत्य | Brahman, ultimate reality |
| क | पद-संदर्भ चिह्न ‘क’ | verse reference marker ‘क’ |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 39 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 3.39
- सहायक विषय
- शबरीपर कृपा, नवधा भक्ति-उपदेश और पम्पासरकी ओर प्रस्थान
- मुद्रित पृष्ठ
- 671, 672
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।