अरण्यकाण्ड · दोहा 11 · दोहा/सोरठा
अनुज जानकी सहित प्रभु चाप बान धर राम।
अनुज जानकी सहित प्रभु चाप बान धर राम।
मम हिय गगन इंदु इव बसहु सदा निहकाम।।11।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 3.11 · पुस्तक पृ. 633, 635
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अनुज जानकी सहित प्रभु चाप बान धर राम।
हे धनुष-बाण धारण करने वाले प्रभु राम, छोटे भाई लक्ष्मण और जानकी सहित—
English explanation
O Lord Rama, bearer of bow and arrow, together with your younger brother Lakshmana and Janaki—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | younger brother Lakshmana |
| जानकी | सीता, जनक की पुत्री | Sita, daughter of Janaka |
| सहित | के साथ | together with |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| चाप | धनुष | bow |
| बान | बाण | arrow |
| धर | धारण करने वाले | bearer of |
| राम | हे राम | O Rama |
2 मम हिय गगन इंदु इव बसहु सदा निहकाम।।11।।
मेरे हृदय के आकाश में चंद्रमा की तरह सदा निवास कीजिए, हे कामना-रहित प्रभु।
English explanation
Dwell forever like the moon in the sky of my heart, O desireless Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| हिय | हृदय रूपी | heart pictured as |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| इंदु | चंद्रमा | the moon |
| इव | की तरह | like |
| बसहु | निवास कीजिए | dwell |
| सदा | सदा | forever |
| निहकाम | हे कामना-रहित प्रभु | O desireless Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 11
- स्रोत अभिलेख
- 3.11
- सहायक विषय
- सुतीक्ष्णजीका प्रेम, अगस्त्य-मिलन, अगस्त्य-संवाद, रामका दण्डक-वन-प्रवेश और जटायु-मिलन
- मुद्रित पृष्ठ
- 633, 635
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।