अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
मनोज वैरि वंदितं। अजादि देव सेवितं।।
मूल पाठ
मनोज वैरि वंदितं। अजादि देव सेवितं।।
विशुद्ध बोध विग्रहं। समस्त दूषणापहं।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 623, 624
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप कामदेवके शत्रु महादेवजीके द्वारा वन्दित, ब्रह्मा आदि देवताओंसे सेवित, विशुद्ध ज्ञानमय विग्रह और समस्त दोषोंको नष्ट करनेवाले हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 623 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 मनोज वैरि वंदितं। अजादि देव सेवितं।।
English explanation
I worship Rama, revered by Shiva, the foe of the love-god, and served by Brahma and other gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मनोज | कामदेव के | of the love-god |
| वैरि | शत्रु शिव द्वारा | by his foe, Shiva |
| वंदितं | वंदित को | the revered one |
| अजादि | ब्रह्मा आदि | Brahma and other |
| देव | देवताओं द्वारा | by gods |
| सेवितं | सेवित को | the one served |
2 विशुद्ध बोध विग्रहं। समस्त दूषणापहं।।
English explanation
I worship Rama, embodiment of pure awareness and remover of all defects.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| विशुद्ध | पूर्णतः शुद्ध | perfectly pure |
| बोध | ज्ञान का | of awareness |
| विग्रहं | मूर्त स्वरूप को | the embodiment |
| समस्त | सभी | all |
| दूषणापहं | दोषों को दूर करने वाले को | the remover of defects |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 623
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 623, 624
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।