अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
नमामि इंदिरा पतिं। सुखाकरं सतां गतिं।।
मूल पाठ
नमामि इंदिरा पतिं। सुखाकरं सतां गतिं।।
भजे सशक्ति सानुजं। शची पतिं प्रियानुजं।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 623, 624
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे लक्ष्मीपते! हे सुखोंकी खान और सत्पुरुषोंकी एकमात्र गति! मैं आपको नमस्कार करता हूँ। हे शचीपति (इन्द्र) के प्रिय छोटे भाई (वामनजी)! स्वरूपा-शक्ति श्रीसीताजी और छोटे भाई लक्ष्मणजीसहित आपको मैं भजता हूँ॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 623 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नमामि इंदिरा पतिं। सुखाकरं सतां गतिं।।
English explanation
I bow to Lakshmi's consort, the source of happiness and the refuge of the virtuous.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नमामि | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| इंदिरा | लक्ष्मी के | of Lakshmi |
| पतिं | पति को | the consort |
| सुखाकरं | सुख के स्रोत को | the source of happiness |
| सतां | सज्जनों के | of the virtuous |
| गतिं | आश्रय और परम लक्ष्य को | the refuge and ultimate destination |
2 भजे सशक्ति सानुजं। शची पतिं प्रियानुजं।।
English explanation
I worship Rama with his divine power, Sita, and younger brother Lakshmana, as the beloved younger brother of Indra, Shachi's husband.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भजे | मैं भजन करता हूँ | I worship |
| सशक्ति | अपनी शक्ति सीता सहित | with his power, Sita |
| सानुजं | छोटे भाई लक्ष्मण सहित को | the one accompanied by younger brother Lakshmana |
| शची | शची के | of Shachi |
| पतिं | पति इंद्र के | of her husband, Indra |
| प्रियानुजं | प्रिय छोटे भाई को | the beloved younger brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 623
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 623, 624
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।