अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
दिनेश वंश मंडनं। महेश चाप खंडनं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसूर्यवंशके भूषण, महादेवजीके धनुषको तोडऩेवाले, मुनिराजों और संतोंको आनन्द देनेवाले तथा देवताओंके शत्रु असुरोंके समूहका नाश करनेवाले हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 623 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दिनेश वंश मंडनं। महेश चाप खंडनं।।
मुनींद्र संत रंजनं। सुरारि वृंद भंजनं।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 623, 624
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 दिनेश वंश मंडनं। महेश चाप खंडनं।।
English explanation
I worship Rama, ornament of the solar dynasty and breaker of Shiva's bow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिनेश | सूर्य के | of the sun |
| वंश | वंश के | of the dynasty |
| मंडनं | शोभा बढ़ाने वाले को | the ornament |
| महेश | शिव के | of Shiva |
| चाप | धनुष को | the bow |
| खंडनं | तोड़ने वाले को | the breaker |
2 मुनींद्र संत रंजनं। सुरारि वृंद भंजनं।।
English explanation
I worship Rama, who delights great sages and saints and destroys hosts of the gods' enemies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनींद्र | श्रेष्ठ मुनियों को | great sages |
| संत | संतों को | saints |
| रंजनं | आनंद देने वाले को | the delighter |
| सुरारि | देवताओं के शत्रुओं के | of the gods' enemies |
| वृंद | समूहों को | hosts |
| भंजनं | नष्ट करने वाले को | the destroyer |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 623
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 623, 624
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।