अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
प्रलंब बाहु विक्रमं। प्रभोऽप्रमेय वैभवं।।
मूल पाठ
प्रलंब बाहु विक्रमं। प्रभोऽप्रमेय वैभवं।।
निषंग चाप सायकं। धरं त्रिलोक नायकं।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 623, 624
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे प्रभो! आपकी लंबी भुजाओंका पराक्रम और आपका ऐश्वर्य अप्रमेय (बुद्धिके परे अथवा असीम) है। आप तरकस और धनुष-बाण धारण करनेवाले तीनों लोकोंके स्वामी,॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 623 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रलंब बाहु विक्रमं। प्रभोऽप्रमेय वैभवं।।
English explanation
O Lord, I worship you, with long arms and valor, and immeasurable majesty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रलंब | लंबी | long |
| बाहु | भुजाओं वाले | armed |
| विक्रमं | पराक्रमी को | the valorous one |
| प्रभोऽप्रमेय | हे प्रभु, अपरिमेय | O Lord, immeasurable |
| वैभवं | वैभव वाले को | the one possessing majesty |
2 निषंग चाप सायकं। धरं त्रिलोक नायकं।।
English explanation
I worship Rama, bearer of a quiver, bow, and arrows, and lord of the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निषंग | तरकश | quiver |
| चाप | धनुष | bow |
| सायकं | बाण | arrows |
| धरं | धारण करने वाले को | the bearer |
| त्रिलोक | तीनों लोकों के | of the three worlds |
| नायकं | नायक को | the lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 623
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 623, 624
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।