अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
निकाम श्याम सुंदरं। भवाम्बुनाथ मंदरं।।
मूल पाठ
निकाम श्याम सुंदरं। भवाम्बुनाथ मंदरं।।
प्रफुल्ल कंज लोचनं। मदादि दोष मोचनं।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 623, 624
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप नितान्त सुन्दर श्याम, संसार [आवागमन] रूपी समुद्रको मथनेके लिये मन्दराचलरूप, फूले हुए कमलके समान नेत्रोंवाले और मद आदि दोषोंसे छुड़ानेवाले हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 623 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निकाम श्याम सुंदरं। भवाम्बुनाथ मंदरं।।
English explanation
I worship the exceedingly beautiful, dark-hued Rama, who is like Mount Mandara for the ocean of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निकाम | अत्यंत | exceedingly |
| श्याम | साँवले | dark-hued |
| सुंदरं | सुंदर को | the beautiful one |
| भवाम्बुनाथ | संसार-सागर के लिए | for the ocean of worldly existence |
| मंदरं | मंदर पर्वत के समान को | one like Mount Mandara |
2 प्रफुल्ल कंज लोचनं। मदादि दोष मोचनं।।
English explanation
I worship Rama, whose eyes resemble blooming lotuses and who removes pride and other faults.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रफुल्ल | खिले हुए | fully blossomed |
| कंज | कमल जैसे | lotus-like |
| लोचनं | नेत्रों वाले को | the one with such eyes |
| मदादि | अहंकार आदि | pride and other |
| दोष | दोषों को | faults |
| मोचनं | दूर करने वाले को | the remover |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 623
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 623, 624
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।