अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
भट कटत तन सत खंड। पुनि उठत करि पाषंड।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयोद्धाओंके शरीर कटकर सैकड़ों टुकड़े हो जाते हैं। वे फिर माया करके उठ खड़े होते हैं। आकाशमें बहुत-सी भुजाएँ और सिर उड़ रहे हैं तथा बिना सिरके धड़ दौड़ रहे हैं॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 647 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भट कटत तन सत खंड। पुनि उठत करि पाषंड।।
नभ उड़त बहु भुज मुंड। बिनु मौलि धावत रुंड।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 646, 648
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भट कटत तन सत खंड। पुनि उठत करि पाषंड।।
English explanation
The warriors’ bodies are cut into hundreds of pieces, yet they rise again through deceptive magic.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भट | योद्धा | warriors |
| कटत | कटते हैं | are cut |
| तन | शरीर | bodies |
| सत | सौ; सैकड़ों | a hundred; hundreds |
| खंड | टुकड़ों में | into pieces |
| पुनि | फिर | again |
| उठत | उठते हैं | rise |
| करि | करके | performing |
| पाषंड | मायावी छल | deceptive magic |
2 नभ उड़त बहु भुज मुंड। बिनु मौलि धावत रुंड।।
English explanation
Many arms and heads fly through the sky; headless trunks run about.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नभ | आकाश में | in the sky |
| उड़त | उड़ते हैं | fly |
| बहु | अनेक | many |
| भुज | भुजाएँ | arms |
| मुंड | सिर | heads |
| बिनु | बिना | without |
| मौलि | सिर | heads |
| धावत | दौड़ते हैं | run |
| रुंड | धड़ | headless trunks |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 647
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 646, 648
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।