अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
खग कंक काक सृगाल। कटकटहिं कठिन कराल।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दचील [या क्रौंच], कौए आदि पक्षी और सियार कठोर और भयङ्कर कट-कट शब्द कर रहे हैं॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 647 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
खग कंक काक सृगाल। कटकटहिं कठिन कराल।।
स्रोत अभिलेख 3.2 · पुस्तक पृ. 646, 648
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 खग कंक काक सृगाल। कटकटहिं कठिन कराल।।
English explanation
Birds, carrion birds, crows, and jackals make harsh, dreadful clattering sounds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खग | पक्षी | birds |
| कंक | कंक नामक मांसभक्षी पक्षी | carrion birds called kanka |
| काक | कौए | crows |
| सृगाल | सियार | jackals |
| कटकटहिं | कटकट की ध्वनि करते हैं | make clattering sounds |
| कठिन | कठोर; कर्कश | harsh |
| कराल | भयानक | terrible |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.2
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 647
- सहायक विषय
- शूर्पणखाकी कथा, शूर्पणखाका खर-दूषणके पास जाना और खर-दूषणादिका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 646, 648
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।