अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
भजामि भाव वल्लभं। कुयोगिनां सुदुर्लभं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[तथा] जो भावप्रिय, कुयोगियों (विषयी पुरुषों)के लिये अत्यन्त दुर्लभ, अपने भक्तोंके लिये कल्पवृक्ष (अर्थात् उनकी समस्त कामनाओंको पूर्ण करनेवाले), सम (पक्षपातरहित) और सदा सुखपूर्वक सेवन करनेयोग्य हैं; मैं निरन्तर भजता हूँ॥ १०॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 624 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
भजामि भाव वल्लभं। कुयोगिनां सुदुर्लभं।।
स्वभक्त कल्प पादपं। समं सुसेव्यमन्वहं।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 623, 624
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 भजामि भाव वल्लभं। कुयोगिनां सुदुर्लभं।।
English explanation
I worship the Lord who cherishes loving devotion and is exceedingly hard for misguided yogis to attain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भजामि | मैं भजन करता हूँ | I worship |
| भाव | प्रेमभाव के | of loving devotion |
| वल्लभं | प्रिय को | the beloved |
| कुयोगिनां | त्रुटिपूर्ण साधना वाले योगियों के लिए | for misguided yogis |
| सुदुर्लभं | अत्यंत दुर्लभ को | the exceedingly hard to attain |
2 स्वभक्त कल्प पादपं। समं सुसेव्यमन्वहं।।
English explanation
I worship the Lord who is a wish-fulfilling tree for his devotees, impartial, and worthy of devoted service every day.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| स्वभक्त | अपने भक्तों के लिए | for his own devotees |
| कल्प | मनोरथ पूर्ण करने वाला | wish-fulfilling |
| पादपं | वृक्ष के समान को | the one like a tree |
| समं | समभाव वाले को | the impartial one |
| सुसेव्यमन्वहं | प्रतिदिन भली प्रकार सेवनीय को | the one worthy of devoted service daily |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 624
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 623, 624
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।