अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
अनूप रूप भूपतिं। नतोऽहमुर्विजा पतिं।।
मूल पाठ
अनूप रूप भूपतिं। नतोऽहमुर्विजा पतिं।।
प्रसीद मे नमामि ते। पदाब्ज भक्ति देहि मे।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 623, 624
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे अनुपम सुन्दर! हे पृथ्वीपति! हे जानकीनाथ! मैं आपको प्रणाम करता हूँ। मुझपर प्रसन्न होइये, मैं आपको नमस्कार करता हूँ। मुझे अपने चरणकमलोंकी भक्ति दीजिये॥ ११॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 624 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अनूप रूप भूपतिं। नतोऽहमुर्विजा पतिं।।
English explanation
I bow to the king of incomparable beauty, husband of Sita, daughter of the earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनूप | अनुपम | incomparable |
| रूप | रूप वाले | in beauty |
| भूपतिं | राजा को | the king |
| नतोऽहमुर्विजा | मैं नत हूँ; पृथ्वी-पुत्री सीता के | I bow; of Sita, daughter of the earth |
| पतिं | पति को | the husband |
2 प्रसीद मे नमामि ते। पदाब्ज भक्ति देहि मे।।
English explanation
Be gracious to me; I bow to you. Grant me devotion to your lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रसीद | प्रसन्न हों, कृपा करें | be gracious |
| मे | मुझ पर | toward me |
| नमामि | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow |
| ते | आपको | to you |
| पदाब्ज | चरण-कमलों की | to the lotus feet |
| भक्ति | भक्ति | devotion |
| देहि | दीजिए | grant |
| मे | मुझे | to me |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 624
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 623, 624
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।