अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
पठंति ये स्तवं इदं। नरादरेण ते पदं।।
मूल पाठ
पठंति ये स्तवं इदं। नरादरेण ते पदं।।
व्रजंति नात्र संशयं। त्वदीय भक्ति संयुता।।
स्रोत अभिलेख 3.4 · पुस्तक पृ. 623, 624
भावार्थ
मूल पाठ के बादजो मनुष्य इस स्तुतिको आदरपूर्वक पढ़ते हैं, वे आपकी भक्तिसे युक्त होकर आपके परमपदको प्राप्त होते हैं, इसमें सन्देह नहीं॥ १२॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 624 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 पठंति ये स्तवं इदं। नरादरेण ते पदं।।
English explanation
Those people who recite this hymn reverently reach your supreme abode—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पठंति | पढ़ते हैं | recite |
| ये | जो | who |
| स्तवं | स्तुति को | the hymn |
| इदं | इस | this |
| नरादरेण | मनुष्य आदरपूर्वक | people, reverently |
| ते | आपके | your |
| पदं | परम पद को | the supreme abode |
2 व्रजंति नात्र संशयं। त्वदीय भक्ति संयुता।।
English explanation
Endowed with devotion to you, they attain it; there is no doubt about this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| व्रजंति | प्राप्त होते हैं | attain |
| नात्र | इसमें नहीं | not in this |
| संशयं | संदेह | doubt |
| त्वदीय | आपकी | to you |
| भक्ति | भक्ति से | with devotion |
| संयुता | युक्त | endowed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 624
- सहायक विषय
- अत्रि-मिलन एवं स्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 623, 624
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।