अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
बलमप्रमेयमनादिमजमब्यक्तमेकमगोचरं ।
मूल पाठ
बलमप्रमेयमनादिमजमब्यक्तमेकमगोचरं ।
गोबिंद गोपर द्वंद्वहर बिग्यानघन धरनीधरं॥
जे राम मंत्र जपंत संत अनंत जन मन रंजनं।
नित नौमि राम अकाम प्रिय कामादि खल दल गंजनं॥ २॥
स्रोत अभिलेख 3.32 · पुस्तक पृ. 663, 663
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप अपरिमित बलवाले हैं, अनादि, अजन्मा, अव्यक्त (निराकार), एक, अगोचर (अलक्ष्य), गोविन्द (वेदवाक्योंद्वारा जाननेयोग्य), इन्द्रियोंसे अतीत, [जन्म-मरण, सुख-दु:ख, हर्ष-शोकादि] द्वन्द्वोंको हरनेवाले, विज्ञानकी घनमूॢत और पृथ्वीके आधार हैं तथा जो संत राम-मन्त्रको जपते हैं, उन अनन्त सेवकोंके मनको आनन्द देनेवाले हैं। उन निष्कामप्रिय (निष्कामजनोंके प्रेमी अथवा उन्हें प्रिय) तथा काम आदि दुष्टों (दुष्ट-वृत्तियों) के दलका दलन करनेवाले श्रीरामजीको मैं नित्य नमस्कार करता हूँ॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 664 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1बलमप्रमेयमनादिमजमब्यक्तमेकमगोचरं ।
English explanation
His strength is immeasurable; he is beginningless, unborn, unmanifest, one, and beyond sensory perception.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बलमप्रमेयमनादिमजमब्यक्तमेकमगोचरं | अपरिमेय बल वाले, अनादि, अजन्मा, अव्यक्त, एक और इंद्रियों से अगोचर | of immeasurable strength, beginningless, unborn, unmanifest, one, and beyond sensory perception |
2गोबिंद गोपर द्वंद्वहर बिग्यानघन धरनीधरं॥
English explanation
He is Govinda, beyond the senses, remover of dualities, the embodiment of pure knowledge, and sustainer of the earth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गोबिंद | गोविंद, भगवान का नाम | Govinda, a name of the Lord |
| गोपर | इंद्रियों से परे | beyond the senses |
| द्वंद्वहर | द्वंद्वों को हरने वाले | remover of dualities |
| बिग्यानघन | विशुद्ध ज्ञान के घनस्वरूप | embodiment of pure knowledge |
| धरनीधरं | पृथ्वी को धारण करने वाले | sustainer of the earth |
3जे राम मंत्र जपंत संत अनंत जन मन रंजनं।
English explanation
Saints chant his Rama-mantra; he is infinite and delights people’s hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जिनका | whose |
| राम | राम-नाम का | of Rama’s name |
| मंत्र | मंत्र | sacred formula |
| जपंत | जपते हैं | chant |
| संत | संतजन | saints |
| अनंत | अनंत | infinite |
| जन | लोगों के | people’s |
| मन | मन को | hearts |
| रंजनं | आनंद देने वाले | delighter of |
4नित नौमि राम अकाम प्रिय कामादि खल दल गंजनं॥ २॥
English explanation
I daily bow to Rama, dear to those free of desire, who destroys the wicked host of desire and other vices.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | नित्य | daily |
| नौमि | मैं प्रणाम करता हूँ | I bow to |
| राम | भगवान राम को | Lord Rama |
| अकाम | निष्काम जनों को | to those free of desire |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| कामादि | काम आदि विकारों का | of desire and other vices |
| खल | दुष्ट | wicked |
| दल | समूह | host |
| गंजनं | नाश करने वाले | destroyer |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 664
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 663, 663
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।