अरण्यकाण्ड · छंद · छंद
जो अगम सुगम सुभाव निर्मल असम सम सीतल सदा।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो अगम और सुगम हैं, निर्मलस्वभाव हैं, विषम और सम हैं और सदा शीतल (शान्त) हैं। मन और इन्द्रियोंको सदा वशमें करते हुए योगी बहुत साधन करनेपर जिन्हें देख पाते हैं, वे तीनों लोकोंके स्वामी, रमानिवास श्रीरामजी निरन्तर अपने दासोंके वशमें रहते हैं, वे ही मेरे हृदयमें निवास करें, जिनकी पवित्र कीॢत आवागमनको मिटानेवाली है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 664 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जो अगम सुगम सुभाव निर्मल असम सम सीतल सदा।
पस्यंति जं जोगी जतन करि करत मन गो बस सदा॥
सो राम रमा निवास संतत दास बस त्रिभुवन धनी।
मम उर बसउ सो समन संसृति जासु कीरति पावनी॥ ४॥
स्रोत अभिलेख 3.32 · पुस्तक पृ. 663, 663
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1जो अगम सुगम सुभाव निर्मल असम सम सीतल सदा।
English explanation
Who is beyond reach yet readily accessible, pure in nature, unequalled, impartial, and always serene—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जो | जो | who |
| अगम | पहुँच से परे | beyond reach |
| सुगम | सहज सुलभ | readily accessible |
| सुभाव | स्वभाव से | in nature |
| निर्मल | निर्मल | pure |
| असम | अतुलनीय | unequalled |
| सम | समभाव वाले | impartial |
| सीतल | शांत और शीतल | serene and soothing |
| सदा | सदा | always |
2पस्यंति जं जोगी जतन करि करत मन गो बस सदा॥
English explanation
Whom yogis behold through effort, continually keeping the mind and senses under control—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पस्यंति | देखते हैं | behold |
| जं | जिन्हें | whom |
| जोगी | योगीजन | yogis |
| जतन | प्रयत्न | effort |
| करि | करके | making |
| करत | करते हुए | keeping |
| मन | मन को | the mind |
| गो | इंद्रियों को | the senses |
| बस | वश में | under control |
| सदा | सदा | continually |
3सो राम रमा निवास संतत दास बस त्रिभुवन धनी।
English explanation
That same Rama, the abode of Lakshmi and lord of the three worlds, is always subject to his devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही | that same |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| रमा | लक्ष्मी का | of Lakshmi |
| निवास | निवासस्थान | abode |
| संतत | सदा | always |
| दास | भक्तों के | to his devotees |
| बस | वश में | subject |
| त्रिभुवन | तीनों लोकों के | of the three worlds |
| धनी | स्वामी | lord |
4मम उर बसउ सो समन संसृति जासु कीरति पावनी॥ ४॥
English explanation
May that Rama dwell in my heart—he who brings worldly existence to an end and whose glory purifies.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| उर | हृदय में | in the heart |
| बसउ | बसें | may dwell |
| सो | वे | that one |
| समन | शमन करने वाले | one who brings to an end |
| संसृति | जन्म-मरण के संसार-चक्र का | the cycle of worldly existence |
| जासु | जिनकी | whose |
| कीरति | कीर्ति | glory |
| पावनी | पवित्र करने वाली | purifying |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 3.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 664
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 663, 663
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।