अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
होइहि भजनु न तामस देहा। मन क्रम बचन मंत्र दृढ़ एहा।।
मूल पाठ
होइहि भजनु न तामस देहा। मन क्रम बचन मंत्र दृढ़ एहा।।
जौं नररुप भूपसुत कोऊ। हरिहउँ नारि जीति रन दोऊ।।
स्रोत अभिलेख 3.23 · पुस्तक पृ. 651, 652
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस तामस शरीरसे भजन तो होगा नहीं; अतएव मन, वचन और कर्मसे यही दृढ़ निश्चय है। और यदि वे मनुष्यरूप कोई राजकुमार होंगे तो उन दोनोंको रणमें जीतकर उनकी स्त्रीको हर लूँगा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 651 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 होइहि भजनु न तामस देहा। मन क्रम बचन मंत्र दृढ़ एहा।।
English explanation
Devotional worship will not be possible with this body dominated by darkness; this is my firm resolve in thought, deed, and speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होइहि | हो सकेगा | will be possible |
| भजनु | भगवान का भजन | devotional worship |
| न | नहीं | not |
| तामस | तमोगुण-प्रधान | dominated by darkness and inertia |
| देहा | शरीर से | with this body |
| मन | मन से | in thought |
| क्रम | कर्म से | in deed |
| बचन | वचन से | in speech |
| मंत्र | संकल्प या निश्चय | resolve or decision |
| दृढ़ | अटल | firm |
| एहा | यही | this very one |
2 जौं नररुप भूपसुत कोऊ। हरिहउँ नारि जीति रन दोऊ।।
English explanation
If he is merely some prince in human form, I shall defeat both brothers in battle and abduct his wife.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जौं | यदि | if |
| नररुप | मनुष्य रूप वाला | in human form |
| भूपसुत | राजा का पुत्र | a king’s son |
| कोऊ | कोई | some |
| हरिहउँ | हरण करूँगा | I shall abduct |
| नारि | उसकी पत्नी | his wife |
| जीति | जीतकर | having defeated |
| रन | युद्ध में | in battle |
| दोऊ | दोनों को | both of them |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 651
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 651, 652
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।