अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुर रंजन भंजन महि भारा। जौं भगवंत लीन्ह अवतारा।।
मूल पाठ
सुर रंजन भंजन महि भारा। जौं भगवंत लीन्ह अवतारा।।
तौ मै जाइ बैरु हठि करऊँ। प्रभु सर प्रान तजें भव तरऊँ।।
स्रोत अभिलेख 3.23 · पुस्तक पृ. 651, 652
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवताओंको आनन्द देनेवाले और पृथ्वीका भार हरण करनेवाले भगवान्ने ही यदि अवतार लिया है तो मैं जाकर उनसे हठपूर्वक वैर करूँगा और प्रभुके बाण [के आघात] से प्राण छोड़कर भवसागरसे तर जाऊँगा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 651 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुर रंजन भंजन महि भारा। जौं भगवंत लीन्ह अवतारा।।
English explanation
If the Lord has taken an incarnation to delight the gods and remove the earth’s burden—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवताओं को | the gods |
| रंजन | प्रसन्न करने के लिए | to delight |
| भंजन | दूर करने के लिए | to remove |
| महि | पृथ्वी का | of the earth |
| भारा | भार | burden |
| जौं | यदि | if |
| भगवंत | भगवान ने | the Lord |
| लीन्ह | लिया है | has taken |
| अवतारा | अवतार | an incarnation |
2 तौ मै जाइ बैरु हठि करऊँ। प्रभु सर प्रान तजें भव तरऊँ।।
English explanation
Then I shall go and stubbornly make myself his enemy; by giving up my life to the Lord’s arrow, I shall cross beyond worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तौ | तो | then |
| मै | मैं | I |
| जाइ | जाकर | having gone |
| बैरु | शत्रुता | enmity |
| हठि | हठपूर्वक | stubbornly |
| करऊँ | करूँ | I shall make |
| प्रभु | प्रभु के | the Lord’s |
| सर | बाण से | by the arrow |
| प्रान | प्राण | life |
| तजें | त्यागने पर | upon giving up |
| भव | संसार-सागर | worldly existence |
| तरऊँ | पार करूँ | I shall cross beyond |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 651
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 651, 652
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।