अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुर नर असुर नाग खग माहीं। मोरे अनुचर कहँ कोउ नाहीं।।
मूल पाठ
सुर नर असुर नाग खग माहीं। मोरे अनुचर कहँ कोउ नाहीं।।
खर दूषन मोहि सम बलवंता। तिन्हहि को मारइ बिनु भगवंता।।
स्रोत अभिलेख 3.23 · पुस्तक पृ. 651, 652
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[वह मन-ही-मन विचार करने लगा—] देवता, मनुष्य, असुर, नाग और पक्षियोंमें कोई ऐसा नहीं जो मेरे सेवकको भी पा सके। खर-दूषण तो मेरे ही समान बलवान् थे। उन्हें भगवान्के सिवा और कौन मार सकता है?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 651 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुर नर असुर नाग खग माहीं। मोरे अनुचर कहँ कोउ नाहीं।।
English explanation
Among gods, humans, demons, serpents, and birds, where is anyone who is not my follower?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवता | gods |
| नर | मनुष्य | humans |
| असुर | असुर | demons |
| नाग | नाग | serpents |
| खग | पक्षी | birds |
| माहीं | में | among |
| मोरे | मेरे | my |
| अनुचर | अनुयायी या सेवक | followers or servants |
| कहँ | कहाँ | where |
| कोउ | कोई | anyone |
| नाहीं | नहीं है | is not |
2 खर दूषन मोहि सम बलवंता। तिन्हहि को मारइ बिनु भगवंता।।
English explanation
Khara and Dushana were as powerful as I am; who but the Lord could kill them?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खर | खर नामक राक्षस | Khara, a demon |
| दूषन | दूषण नामक राक्षस | Dushana, a demon |
| मोहि | मेरे | me |
| सम | समान | equal to |
| बलवंता | बलवान | powerful |
| तिन्हहि | उन्हें ही | those very two |
| को | कौन | who |
| मारइ | मार सकता है | could kill |
| बिनु | के बिना; के सिवा | without; other than |
| भगवंता | भगवान | the Lord |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.23
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 651
- सहायक विषय
- शूर्पणखाका रावणके निकट जाना, श्रीसीताजीका अग्रि-प्रवेश और माया-सीता
- मुद्रित पृष्ठ
- 651, 652
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।