अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हा गुन खानि जानकी सीता। रूप सील ब्रत नेम पुनीता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[वे विलाप करने लगे—] हा गुणोंकी खान जानकी! हा रूप, शील, व्रत और नियमोंमें पवित्र सीते! लक्ष्मणजीने बहुत प्रकारसे समझाया। तब श्रीरामजी लताओं और वृक्षोंकी पंक्तियोंसे पूछते हुए चले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 661 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हा गुन खानि जानकी सीता। रूप सील ब्रत नेम पुनीता।।
लछिमन समुझाए बहु भाँती। पूछत चले लता तरु पाँती।।
स्रोत अभिलेख 3.3 · पुस्तक पृ. 660, 662
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हा गुन खानि जानकी सीता। रूप सील ब्रत नेम पुनीता।।
English explanation
Alas, Janaki Sita, treasure of virtues! You are pure in beauty, character, vows, and observances.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हा | हाय! | alas! |
| गुन | गुणों की | of virtues |
| खानि | खान; भंडार | mine; treasure |
| जानकी | हे जनकपुत्री | O daughter of Janaka |
| सीता | हे सीता | O Sita |
| रूप | सौंदर्य | beauty |
| सील | सदाचार; शील | good character |
| ब्रत | व्रत | vows |
| नेम | नियम; धार्मिक अनुशासन | observances; religious discipline |
| पुनीता | पवित्र | pure |
2 लछिमन समुझाए बहु भाँती। पूछत चले लता तरु पाँती।।
English explanation
Lakshmana consoled Rama in many ways. Rama went on, asking the creepers and rows of trees about Sita.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| समुझाए | समझाया; सांत्वना दी | reassured; consoled |
| बहु | बहुत | many |
| भाँती | प्रकार से | in ways |
| पूछत | पूछते हुए | asking |
| चले | आगे चले | went on |
| लता | लताओं से | the creepers |
| तरु | वृक्षों की | of trees |
| पाँती | पंक्तियों से | the rows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 661
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 660, 662
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