अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अनुज समेत गए प्रभु तहवाँ। गोदावरि तट आश्रम जहवाँ।।
मूल पाठ
अनुज समेत गए प्रभु तहवाँ। गोदावरि तट आश्रम जहवाँ।।
आश्रम देखि जानकी हीना। भए बिकल जस प्राकृत दीना।।
स्रोत अभिलेख 3.3 · पुस्तक पृ. 660, 662
भावार्थ
मूल पाठ के बादलक्ष्मणजीसहित प्रभु श्रीरामजी वहाँ गये जहाँ गोदावरीके तटपर उनका आश्रम था। आश्रमको जानकीजीसे रहित देखकर श्रीरामजी साधारण मनुष्यकी भाँति व्याकुल और दीन (दुखी) हो गये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 661 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अनुज समेत गए प्रभु तहवाँ। गोदावरि तट आश्रम जहवाँ।।
English explanation
Lord Rama went with his younger brother to the hermitage on the bank of the Godavari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | his younger brother Lakshmana |
| समेत | के साथ | together with |
| गए | गए | went |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| तहवाँ | वहाँ | there |
| गोदावरि | गोदावरी नदी के | of the Godavari River |
| तट | तट पर | on the bank |
| आश्रम | आश्रम था | the hermitage stood |
| जहवाँ | जहाँ | where |
2 आश्रम देखि जानकी हीना। भए बिकल जस प्राकृत दीना।।
English explanation
Seeing the hermitage without Janaki, Rama became distressed like an ordinary, sorrow-stricken person.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आश्रम | आश्रम को | the hermitage |
| देखि | देखकर | seeing |
| जानकी | सीता से | of Sita, Janaka’s daughter |
| हीना | रहित | devoid |
| भए | हो गए | became |
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| जस | जैसे | like |
| प्राकृत | साधारण सांसारिक मनुष्य | an ordinary mortal |
| दीना | दुखी; दीन | sorrow-stricken; forlorn |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 661
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 660, 662
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।