अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निसिचर निकर फिरहिं बन माहीं। मम मन सीता आश्रम नाहीं।।
मूल पाठ
निसिचर निकर फिरहिं बन माहीं। मम मन सीता आश्रम नाहीं।।
गहि पद कमल अनुज कर जोरी। कहेउ नाथ कछु मोहि न खोरी।।
स्रोत अभिलेख 3.3 · पुस्तक पृ. 660, 662
भावार्थ
मूल पाठ के बादराक्षसोंके झुंड वनमें फिरते रहते हैं। मेरे मनमें ऐसा आता है कि सीता आश्रममें नहीं है। छोटे भाई लक्ष्मणजीने श्रीरामजीके चरणकमलोंको पकड़कर हाथ जोड़कर कहा—हे नाथ! मेरा कुछ भी दोष नहीं है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 661 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 निसिचर निकर फिरहिं बन माहीं। मम मन सीता आश्रम नाहीं।।
English explanation
Bands of demons roam the forest. I feel that Sita is not in the hermitage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निसिचर | राक्षसों के | of demons |
| निकर | समूह | bands |
| फिरहिं | घूमते हैं | roam |
| बन | वन | forest |
| माहीं | में | in |
| मम | मेरे | my |
| मन | मन को लगता है | mind feels |
| सीता | सीता | Sita |
| आश्रम | आश्रम में | in the hermitage |
| नाहीं | नहीं हैं | is not |
2 गहि पद कमल अनुज कर जोरी। कहेउ नाथ कछु मोहि न खोरी।।
English explanation
His younger brother clasped Rama’s lotus feet, joined his hands, and said, ‘Lord, I am not at fault in this.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गहि | पकड़कर | clasping |
| पद | चरण | feet |
| कमल | कमल-समान | lotus-like |
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण ने | the younger brother Lakshmana |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | joining |
| कहेउ | कहा | said |
| नाथ | हे स्वामी | O lord |
| कछु | कुछ भी | any |
| मोहि | मेरा; मुझ पर | mine; attributable to me |
| न | नहीं | not |
| खोरी | दोष | fault |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 661
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 660, 662
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