अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रघुपति अनुजहि आवत देखी। बाहिज चिंता कीन्हि बिसेषी।।
मूल पाठ
रघुपति अनुजहि आवत देखी। बाहिज चिंता कीन्हि बिसेषी।।
जनकसुता परिहरिहु अकेली। आयहु तात बचन मम पेली।।
स्रोत अभिलेख 3.3 · पुस्तक पृ. 660, 662
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[इधर] श्रीरघुनाथजीने छोटे भाई लक्ष्मणजीको आते देखकर बाह्यरूपमें बहुत चिन्ता की [और कहा—] हे भाई! तुमने जानकीको अकेली छोड़ दिया और मेरी आज्ञाका उल्लङ्घन कर यहाँ चले आये!॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 660 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 रघुपति अनुजहि आवत देखी। बाहिज चिंता कीन्हि बिसेषी।।
English explanation
AI draft: Rama, lord of the Raghu line, saw his younger brother approaching and outwardly showed great concern.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu line |
| अनुजहि | छोटे भाई लक्ष्मण को | his younger brother Lakshmana |
| आवत | आते हुए | approaching |
| देखी | देखा | saw |
| बाहिज | बाहरी रूप से | outwardly |
| चिंता | चिंता | concern |
| कीन्हि | की | expressed |
| बिसेषी | विशेष; बहुत अधिक | great; pronounced |
2 जनकसुता परिहरिहु अकेली। आयहु तात बचन मम पेली।।
English explanation
Dear brother, you have come here leaving Janaka’s daughter Sita alone and disregarding my words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनकसुता | जनक की पुत्री सीता को | Sita, Janaka’s daughter |
| परिहरिहु | छोड़कर | having left behind |
| अकेली | अकेली | alone |
| आयहु | तुम आ गए | you have come |
| तात | हे प्रिय भाई | dear brother |
| बचन | वचन; निर्देश | words; instruction |
| मम | मेरे | my |
| पेली | अवहेलना करके | disregarding |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 660
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 660, 662
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।