अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो मम लोचन गोचर आगें। राखौं देह नाथ केहि खाँगें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवही (आप) मेरे नेत्रोंके विषय होकर सामने खड़े हैं। हे नाथ! अब मैं किस कमी [की पूॢत] के लिये देहको रखूँ? नेत्रोंमें जल भरकर श्रीरघुनाथजी कहने लगे—हे तात! आपने अपने श्रेष्ठ कर्मोंसे [दुर्लभ] गति पायी है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 663 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सो मम लोचन गोचर आगें। राखौं देह नाथ केहि खाँगें।।
जल भरि नयन कहहिं रघुराई। तात कर्म निज ते गतिं पाई।।
स्रोत अभिलेख 3.31 · पुस्तक पृ. 662, 663
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सो मम लोचन गोचर आगें। राखौं देह नाथ केहि खाँगें।।
English explanation
You yourself now stand before me, visible to my eyes. Lord, for what purpose should I keep this body?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वे ही आप | that very one, you |
| मम | मेरे | my |
| लोचन | नेत्रों के | to the eyes |
| गोचर | प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले | directly visible |
| आगें | सामने | before me |
| राखौं | मैं बनाए रखूँ | should I preserve |
| देह | शरीर | the body |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| केहि | किस | for what |
| खाँगें | प्रयोजन से | purpose |
2 जल भरि नयन कहहिं रघुराई। तात कर्म निज ते गतिं पाई।।
English explanation
With tears filling his eyes, Rama says, “Dear elder, you have attained this state through your own deeds.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जल | आँसू | tears |
| भरि | भरकर | filling |
| नयन | नेत्रों में | the eyes |
| कहहिं | कहते हैं | says |
| रघुराई | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| तात | हे तात | dear elder |
| कर्म | कर्म | deeds |
| निज | अपने | your own |
| ते | से | through |
| गतिं | गति, प्राप्त अवस्था | state attained |
| पाई | आपने पाई | you have attained |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.31
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 663
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका विलाप, जटायुका प्रसंग
- मुद्रित पृष्ठ
- 662, 663
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।