अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो दससीस स्वान की नाई। इत उत चितइ चला भड़िहाई।।
मूल पाठ
सो दससीस स्वान की नाई। इत उत चितइ चला भड़िहाई।।
इमि कुपंथ पग देत खगेसा। रह न तेज बुधि बल लेसा।।
स्रोत अभिलेख 3.28 · पुस्तक पृ. 656, 658
भावार्थ
मूल पाठ के बादवही दस सिरवाला रावण कुत्तेकी तरह इधर-उधर ताकता हुआ भडि़हाई* (चोरी) के लिये चला। [काकभुशुण्डिजी कहते हैं—] हे गरुडज़ी! इस प्रकार कुमार्गपर पैर रखते ही शरीरमें तेज तथा बुद्धि एवं बलका लेश भी नहीं रह जाता॥ ५॥ * सूना पाकर कुत्ता चुपके-से बर्तन-भाड़ोंमें मुँह डालकर कुछ चुरा ले जाता है उसे, 'भडि़हाई कहते हैं।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 657 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सो दससीस स्वान की नाई। इत उत चितइ चला भड़िहाई।।
English explanation
That same ten-headed Ravana went about his theft, looking here and there like a dog.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वही | that same |
| दससीस | दस सिरों वाला रावण | ten-headed Ravana |
| स्वान | कुत्ते | a dog |
| की | के | of |
| नाई | समान | like |
| इत | इधर | here |
| उत | उधर | there |
| चितइ | देखते हुए | looking about |
| चला | चला | went |
| भड़िहाई | चोरी करने | to steal |
2 इमि कुपंथ पग देत खगेसा। रह न तेज बुधि बल लेसा।।
English explanation
O Garuda, lord of birds, on stepping onto such an evil path, not a trace of dignity, wisdom, or strength remains.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इमि | इस प्रकार | thus |
| कुपंथ | बुरे मार्ग पर | onto an evil path |
| पग | कदम | a step |
| देत | रखते ही | upon placing |
| खगेसा | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, lord of birds |
| रह | रहता | remains |
| न | नहीं | not |
| तेज | तेज; प्रताप | radiance; dignity |
| बुधि | बुद्धि; विवेक | intelligence; discernment |
| बल | शक्ति | strength |
| लेसा | लेशमात्र | even a trace |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 657
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना · श्रीसीताहरण और श्रीसीता-विलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 656, 658
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।