अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नाना बिधि करि कथा सुहाई। राजनीति भय प्रीति देखाई।।
मूल पाठ
नाना बिधि करि कथा सुहाई। राजनीति भय प्रीति देखाई।।
कह सीता सुनु जती गोसाईं। बोलेहु बचन दुष्ट की नाईं।।
स्रोत अभिलेख 3.28 · पुस्तक पृ. 656, 658
भावार्थ
मूल पाठ के बादरावणने अनेकों प्रकारकी सुहावनी कथाएँ रचकर सीताजीको राजनीति, भय और प्रेम दिखलाया। सीताजीने कहा—हे यति गोसाईं! सुनो, तुमने तो दुष्टकी तरह वचन कहे॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 657 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 नाना बिधि करि कथा सुहाई। राजनीति भय प्रीति देखाई।।
English explanation
Ravana spoke enticingly in many ways, displaying political persuasion, intimidation, and affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाना | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| करि | करके | having made |
| कथा | बातें | speeches; talk |
| सुहाई | लुभावनी | pleasing; enticing |
| राजनीति | राजनीतिक नीति और युक्तियाँ | political policy and persuasion |
| भय | भय; धमकी | fear; intimidation |
| प्रीति | प्रेम; स्नेह | love; affection |
| देखाई | दिखाए | displayed |
2 कह सीता सुनु जती गोसाईं। बोलेहु बचन दुष्ट की नाईं।।
English explanation
Sita said, ‘Listen, revered ascetic! You have spoken like a wicked man.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| सीता | सीता ने | Sita |
| सुनु | सुनो | listen |
| जती | हे तपस्वी | O ascetic |
| गोसाईं | हे स्वामी; महोदय | revered sir |
| बोलेहु | तुमने कहे | you have spoken |
| बचन | वचन | words |
| दुष्ट | दुष्ट व्यक्ति | a wicked person |
| की | के | of |
| नाईं | समान | in the manner of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.28
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 657
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना · श्रीसीताहरण और श्रीसीता-विलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 656, 658
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।