अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुरपति सुत धरि बायस बेषा। सठ चाहत रघुपति बल देखा।।
मूल पाठ
सुरपति सुत धरि बायस बेषा। सठ चाहत रघुपति बल देखा।।
जिमि पिपीलिका सागर थाहा। महा मंदमति पावन चाहा।।
स्रोत अभिलेख 3.1 · पुस्तक पृ. 620, 620
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवराज इन्द्रका मूर्ख पुत्र जयन्त कौएका रूप धरकर श्रीरघुनाथजीका बल देखना चाहता है। जैसे महान् मन्दबुद्धि चींटी समुद्रका थाह पाना चाहती हो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 620 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुरपति सुत धरि बायस बेषा। सठ चाहत रघुपति बल देखा।।
English explanation
The son of Indra, king of the gods, assumed the form of a crow; the fool wanted to test Rama's strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरपति | देवराज इंद्र का | of Indra, king of the gods |
| सुत | पुत्र | son |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| बायस | कौए का | a crow's |
| बेषा | वेश, रूप | guise or form |
| सठ | मूर्ख, दुष्ट | foolish rogue |
| चाहत | चाहता था | wanted |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम का | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| बल | बल, सामर्थ्य | strength |
| देखा | देखना, परखना | to see or test |
2 जिमि पिपीलिका सागर थाहा। महा मंदमति पावन चाहा।।
English explanation
It was as though an exceedingly foolish ant wished to fathom the ocean.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | as though |
| पिपीलिका | चींटी | an ant |
| सागर | समुद्र की | of the ocean |
| थाहा | थाह, गहराई का माप | depth or measure |
| महा | अत्यंत | exceedingly |
| मंदमति | मंदबुद्धि | foolish |
| पावन | पाना | to obtain |
| चाहा | चाहे | wished |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 620
- सहायक विषय
- जयन्तकी कुटिलता और फलप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 620, 620
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।