अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि मुनि कह पुरान श्रुति संता। मोह बिपिन कहुँ नारि बसंता।।
मूल पाठ
सुनि मुनि कह पुरान श्रुति संता। मोह बिपिन कहुँ नारि बसंता।।
जप तप नेम जलाश्रय झारी। होइ ग्रीषम सोषइ सब नारी।।
स्रोत अभिलेख 3.44 · पुस्तक पृ. 676, 677
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मुनि! सुनो, पुराण, वेद और संत कहते हैं कि मोहरूपी वन [को विकसित करने] के लिये स्त्री वसन्त ऋतुके समान है। जप, तप, नियमरूपी सम्पूर्ण जलके स्थानोंको स्त्री ग्रीष्मरूप होकर सर्वथा सोख लेती है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 676 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि मुनि कह पुरान श्रुति संता। मोह बिपिन कहुँ नारि बसंता।।
English explanation
Listen, sage: the Puranas, Vedas, and saints say that woman is springtime for the forest of delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनिए | listen |
| मुनि | हे मुनि | O sage |
| कह | कहते हैं | say |
| पुरान | पुराण | the Puranas |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| संता | संत | saints |
| मोह | मोह; आसक्तिजन्य भ्रम | delusion arising from attachment |
| बिपिन | वन | forest |
| कहुँ | के लिए | for |
| नारि | नारी | woman |
| बसंता | वसंत ऋतु | springtime |
2 जप तप नेम जलाश्रय झारी। होइ ग्रीषम सोषइ सब नारी।।
English explanation
Becoming summer, woman dries up all the reservoirs of recitation, austerity, and religious observance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जप | मंत्र या नाम का जप | repetition of a mantra or sacred name |
| तप | तपस्या | austerity |
| नेम | धार्मिक नियम और संयम | religious discipline and observance |
| जलाश्रय | जलाशय | reservoirs |
| झारी | सभी; समूचा समूह | all; the entire collection |
| होइ | बनकर | becoming |
| ग्रीषम | ग्रीष्म ऋतु | summer |
| सोषइ | सुखा देती है | dries up |
| सब | सभी को | all of them |
| नारी | नारी | woman |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 676
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 676, 677
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