अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काम क्रोध मद मत्सर भेका। इन्हहि हरषप्रद बरषा एका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकाम, क्रोध, मद और मत्सर (डाह) आदि मेढक हैं। इनको वर्षा-ऋतु होकर हर्ष प्रदान करनेवाली एकमात्र यही (स्त्री) है। बुरी वासनाएँ कुमुदोंके समूह हैं। उनको सदैव सुख देनेवाली यह शरद् ऋतु है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 676 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
काम क्रोध मद मत्सर भेका। इन्हहि हरषप्रद बरषा एका।।
दुर्बासना कुमुद समुदाई। तिन्ह कहँ सरद सदा सुखदाई।।
स्रोत अभिलेख 3.44 · पुस्तक पृ. 676, 677
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 काम क्रोध मद मत्सर भेका। इन्हहि हरषप्रद बरषा एका।।
English explanation
Desire, anger, pride, and envy are frogs; woman alone is the rainy season that delights them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काम | कामवासना | lust |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| मद | अहंकार | pride |
| मत्सर | ईर्ष्या | envy |
| भेका | मेंढक | frogs |
| इन्हहि | इन्हीं को; इन दोषों को | to these very vices |
| हरषप्रद | आनंद देने वाली | giving delight |
| बरषा | वर्षा ऋतु | the rainy season |
| एका | एकमात्र; वही अकेली | the sole one; she alone |
2 दुर्बासना कुमुद समुदाई। तिन्ह कहँ सरद सदा सुखदाई।।
English explanation
Evil desires are a cluster of night-blooming water lilies; for them, woman is autumn, ever bringing delight.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दुर्बासना | बुरी वासनाएँ | evil desires |
| कुमुद | रात में खिलने वाले कुमुद | night-blooming water lilies |
| समुदाई | समूह | cluster |
| तिन्ह | उन कुमुद रूपी वासनाओं | those desires figured as water lilies |
| कहँ | के लिए | for |
| सरद | शरद ऋतु | autumn |
| सदा | सदा | always |
| सुखदाई | सुख देने वाली | bringing delight |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 676
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 676, 677
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