अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धर्म सकल सरसीरुह बृंदा। होइ हिम तिन्हहि दहइ सुख मंदा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसमस्त धर्म कमलोंके झुंड हैं। यह नीच (विषयजन्य) सुख देनेवाली स्त्री हिम-ऋतु होकर उन्हें जला डालती है। फिर ममतारूपी जवासका समूह (वन) स्त्रीरूपी शिशिर-ऋतुको पाकर हरा- भरा हो जाता है॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 677 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
धर्म सकल सरसीरुह बृंदा। होइ हिम तिन्हहि दहइ सुख मंदा।।
पुनि ममता जवास बहुताई। पलुहइ नारि सिसिर रितु पाई।।
स्रोत अभिलेख 3.44 · पुस्तक पृ. 676, 677
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 धर्म सकल सरसीरुह बृंदा। होइ हिम तिन्हहि दहइ सुख मंदा।।
English explanation
All righteous practices are clusters of lotuses; woman becomes frost that blights them and diminishes happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धर्म | धर्म; धर्माचरण | righteous practices |
| सकल | सभी | all |
| सरसीरुह | कमल | lotuses |
| बृंदा | समूह | clusters |
| होइ | बनकर | becoming |
| हिम | पाला | frost |
| तिन्हहि | उन्हीं धर्म रूपी कमलों को | those very lotuses of righteousness |
| दहइ | झुलसा देती है | blights |
| सुख | सुख | happiness |
| मंदा | मंद करने वाली | diminishing |
2 पुनि ममता जवास बहुताई। पलुहइ नारि सिसिर रितु पाई।।
English explanation
Then the abundant growth of possessive attachment, pictured as the javasa shrub, flourishes upon receiving woman as the winter season.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर; और भी | then; furthermore |
| ममता | मेरापन; आसक्ति | possessive attachment |
| जवास | जवास नाम की झाड़ी | the javasa shrub |
| बहुताई | बहुलता; घना समूह | abundance; dense growth |
| पलुहइ | पल्लवित होता है | puts forth new growth |
| नारि | नारी | woman |
| सिसिर | शिशिर; ठंड का अंतिम भाग | the late cold season |
| रितु | ऋतु | season |
| पाई | पाकर | having received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 677
- सहायक विषय
- नारद-राम-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 676, 677
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।