अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि जानकीं परम सुखु पावा। सादर तासु चरन सिरु नावा।।
मूल पाठ
सुनि जानकीं परम सुखु पावा। सादर तासु चरन सिरु नावा।।
तब मुनि सन कह कृपानिधाना। आयसु होइ जाउँ बन आना।।
स्रोत अभिलेख 3.6 · पुस्तक पृ. 627, 628
भावार्थ
मूल पाठ के बादजानकीजीने सुनकर परम सुख पाया और आदरपूर्वक उनके चरणोंमें सिर नवाया। तब कृपाकी खान श्रीरामजीने मुनिसे कहा—आज्ञा हो तो अब दूसरे वनमें जाऊँ॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 627 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1सुनि जानकीं परम सुखु पावा। सादर तासु चरन सिरु नावा।।
English explanation
Hearing this, Sita felt supreme joy and respectfully bowed her head at her feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| जानकीं | जानकी ने; सीता ने | Sita, daughter of Janaka |
| परम | अत्यंत | supreme |
| सुखु | आनंद | joy |
| पावा | पाया | experienced |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| तासु | उनके; अनसूया के | her; Anasuya's |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
2 तब मुनि सन कह कृपानिधाना। आयसु होइ जाउँ बन आना।।
English explanation
Then Rama, the treasure of compassion, said to the sage: If you permit, I shall go to another forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| मुनि | मुनि अत्रि | the sage Atri |
| सन | से | to |
| कह | कहा | said |
| कृपानिधाना | कृपा के भंडार राम | Rama, treasure of compassion |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| होइ | हो | be granted |
| जाउँ | मैं जाऊँ | I may go |
| बन | वन में | to a forest |
| आना | अन्य | another |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 627
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 627, 628
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