अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
संतत मो पर कृपा करेहू। सेवक जानि तजेहु जनि नेहू।।
मूल पाठ
संतत मो पर कृपा करेहू। सेवक जानि तजेहु जनि नेहू।।
धर्म धुरंधर प्रभु कै बानी। सुनि सप्रेम बोले मुनि ग्यानी।।
स्रोत अभिलेख 3.6 · पुस्तक पृ. 627, 628
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुझपर निरन्तर कृपा करते रहियेगा और अपना सेवक जानकर स्नेह न छोडिय़ेगा। धर्मधुरन्धर प्रभु श्रीरामजीके वचन सुनकर ज्ञानी मुनि प्रेमपूर्वक बोले—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 627 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 संतत मो पर कृपा करेहू। सेवक जानि तजेहु जनि नेहू।।
English explanation
Always show me kindness; regard me as your servant and do not withdraw your affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| संतत | निरंतर | always |
| मो | मुझ | me |
| पर | पर | upon |
| कृपा | अनुग्रह | kindness |
| करेहू | करते रहिए | please continue to bestow |
| सेवक | सेवक | servant |
| जानि | समझकर | regarding as |
| तजेहु | छोड़िए | withdraw |
| जनि | मत | do not |
| नेहू | स्नेह | affection |
2 धर्म धुरंधर प्रभु कै बानी। सुनि सप्रेम बोले मुनि ग्यानी।।
English explanation
Hearing the words of the Lord who upholds dharma, the wise sage spoke lovingly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धर्म | धर्म | righteousness |
| धुरंधर | भार सँभालने वाले | stalwart upholder |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| कै | की | of |
| बानी | वाणी | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सप्रेम | प्रेमपूर्वक | lovingly |
| बोले | बोले | spoke |
| मुनि | मुनि अत्रि | the sage Atri |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 627
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 627, 628
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।