अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जासु कृपा अज सिव सनकादी। चहत सकल परमारथ बादी।।
मूल पाठ
जासु कृपा अज सिव सनकादी। चहत सकल परमारथ बादी।।
ते तुम्ह राम अकाम पिआरे। दीन बंधु मृदु बचन उचारे।।
स्रोत अभिलेख 3.6 · पुस्तक पृ. 627, 628
भावार्थ
मूल पाठ के बादब्रह्मा, शिव और सनकादि सभी परमार्थवादी (तत्त्ववेत्ता) जिनकी कृपा चाहते हैं, हे रामजी! आप वही निष्काम पुरुषोंके भी प्रिय और दीनोंके बन्धु भगवान् हैं, जो इस प्रकार कोमल वचन बोल रहे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 627 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जासु कृपा अज सिव सनकादी। चहत सकल परमारथ बादी।।
English explanation
Whose grace Brahma, Shiva, Sanaka and the others, and all seekers of the highest truth desire—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जासु | जिनकी | whose |
| कृपा | कृपा | grace |
| अज | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| सिव | शिव | Shiva |
| सनकादी | सनक आदि ऋषि | Sanaka and the other sages |
| चहत | चाहते हैं | desire |
| सकल | सभी | all |
| परमारथ | परम सत्य; सर्वोच्च आध्यात्मिक लक्ष्य | highest spiritual truth or goal |
| बादी | उसके साधक और प्रतिपादक | its seekers and exponents |
2 ते तुम्ह राम अकाम पिआरे। दीन बंधु मृदु बचन उचारे।।
English explanation
Rama, you are that very one, dear to those free of desire; friend of the lowly, you have spoken gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे ही | that very one |
| तुम्ह | आप | you |
| राम | हे राम | O Rama |
| अकाम | निष्काम जनों को | to those free of desire |
| पिआरे | प्रिय | dear |
| दीन | दीनों के | of the lowly |
| बंधु | बंधु; सहायक | friend and helper |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बचन | वचन | words |
| उचारे | कहे | uttered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 627
- सहायक विषय
- श्रीसीता-अनसूया-मिलन और श्रीसीताजीको अनसूयाजीका पातिव्रतधर्म कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 627, 628
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।