अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनहु प्रिया ब्रत रुचिर सुसीला। मैं कछु करबि ललित नरलीला।।
मूल पाठ
सुनहु प्रिया ब्रत रुचिर सुसीला। मैं कछु करबि ललित नरलीला।।
तुम्ह पावक महुँ करहु निवासा। जौ लगि करौं निसाचर नासा।।
स्रोत अभिलेख 3.24 · पुस्तक पृ. 652, 653
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे प्रिये! हे सुन्दर पातिव्रत-धर्मका पालन करनेवाली सुशीले! सुनो! मैं अब कुछ मनोहर मनुष्यलीला करूँगा। इसलिये जबतक मैं राक्षसोंका नाश करूँ, तबतक तुम अग्रिमें निवास करो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 652 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनहु प्रिया ब्रत रुचिर सुसीला। मैं कछु करबि ललित नरलीला।।
English explanation
Listen, dear one of beautiful vows and virtuous nature. I shall enact some graceful human deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनो | listen |
| प्रिया | हे प्रिय सीता | dear Sita |
| ब्रत | व्रत; आचरण का संकल्प | vows; commitments of conduct |
| रुचिर | सुंदर, मनोहर | beautiful, pleasing |
| सुसीला | सुशील स्वभाव वाली | of virtuous disposition |
| मैं | मैं | I |
| कछु | कुछ | some |
| करबि | करूँगा | shall perform |
| ललित | मनोहर | graceful, charming |
| नरलीला | मनुष्य के रूप में लीला | deeds enacted in human form |
2 तुम्ह पावक महुँ करहु निवासा। जौ लगि करौं निसाचर नासा।।
English explanation
Dwell within the fire until I have destroyed the demons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम | you |
| पावक | अग्नि | fire |
| महुँ | में | in |
| करहु | करो | make; undertake |
| निवासा | निवास | your dwelling |
| जौ | जब तक | until |
| लगि | तक | up to that time |
| करौं | मैं करूँ | I carry out |
| निसाचर | राक्षसों का | of the demons |
| नासा | विनाश | destruction |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 652
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 652, 653
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।