अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जबहिं राम सब कहा बखानी। प्रभु पद धरि हियँ अनल समानी।।
मूल पाठ
जबहिं राम सब कहा बखानी। प्रभु पद धरि हियँ अनल समानी।।
निज प्रतिबिंब राखि तहँ सीता। तैसइ सील रुप सुबिनीता।।
स्रोत अभिलेख 3.24 · पुस्तक पृ. 652, 653
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीने ज्यों ही सब समझाकर कहा, त्यों ही श्रीसीताजी प्रभुके चरणोंको हृदयमें धरकर अग्निमें समा गयीं। सीताजीने अपनी ही छायामूॢत वहाँ रख दी, जो उनके-जैसे ही शील-स्वभाव और रूपवाली तथा वैसे ही विनम्र थी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 652 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जबहिं राम सब कहा बखानी। प्रभु पद धरि हियँ अनल समानी।।
English explanation
As soon as Rama had explained everything, Sita entered the fire, holding her lord’s feet in her heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जबहिं | जैसे ही | as soon as |
| राम | राम ने | Rama |
| सब | सब कुछ | everything |
| कहा | कहा | said |
| बखानी | विस्तार से समझाकर | having explained fully |
| प्रभु | प्रभु राम के | of her lord Rama |
| पद | चरण | feet |
| धरि | धारण करके | holding |
| हियँ | हृदय में | in her heart |
| अनल | अग्नि में | into the fire |
| समानी | समा गईं | entered |
2 निज प्रतिबिंब राखि तहँ सीता। तैसइ सील रुप सुबिनीता।।
English explanation
Sita left her own likeness there, identical in character and appearance and equally modest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपना | her own |
| प्रतिबिंब | प्रतिरूप; प्रतिबिंब | likeness; reflected counterpart |
| राखि | रखकर | having left |
| तहँ | वहाँ | there |
| सीता | सीता ने | Sita |
| तैसइ | वैसा ही | just the same |
| सील | शील; स्वभाव | character; disposition |
| रुप | रूप; आकृति | appearance; form |
| सुबिनीता | अत्यंत विनम्र | very modest |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 652
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 652, 653
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।