अरण्यकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लछिमनहूँ यह मरमु न जाना। जो कछु चरित रचा भगवाना।।
मूल पाठ
लछिमनहूँ यह मरमु न जाना। जो कछु चरित रचा भगवाना।।
दसमुख गयउ जहाँ मारीचा। नाइ माथ स्वारथ रत नीचा।।
स्रोत अभिलेख 3.24 · पुस्तक पृ. 652, 653
भावार्थ
मूल पाठ के बादभगवान्ने जो कुछ लीला रची, इस रहस्यको लक्ष्मणजीने भी नहीं जाना। स्वार्थपरायण और नीच रावण वहाँ गया जहाँ मारीच था और उसको सिर नवाया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 652 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 लछिमनहूँ यह मरमु न जाना। जो कछु चरित रचा भगवाना।।
English explanation
Even Lakshmana did not know this secret of the deeds the Lord had devised.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लछिमनहूँ | लक्ष्मण भी | even Lakshmana, Rama’s brother |
| यह | यह | this |
| मरमु | रहस्य; मर्म | secret; inner meaning |
| न | नहीं | not |
| जाना | जाना; समझा | knew; understood |
| जो | जो | which; whatever |
| कछु | कुछ | anything; all that |
| चरित | लीला; घटनाक्रम | deeds; course of events |
| रचा | रचा | devised; enacted |
| भगवाना | भगवान राम ने | the Lord Rama |
2 दसमुख गयउ जहाँ मारीचा। नाइ माथ स्वारथ रत नीचा।।
English explanation
Ravana went to where Maricha was. That base man, absorbed in his own interests, bowed his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दसमुख | दस मुख वाला रावण | Ravana, the ten-headed king |
| गयउ | गया | went |
| जहाँ | जहाँ | where |
| मारीचा | राक्षस मारीच था | the demon Maricha was |
| नाइ | झुकाकर | bowing |
| माथ | सिर | his head |
| स्वारथ | अपने स्वार्थ में | in his own self-interest |
| रत | लगा हुआ | absorbed |
| नीचा | नीच व्यक्ति | the base man |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अरण्यकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 3.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 652
- सहायक विषय
- मारीचप्रसंग और स्वर्ण-मृगरूपमें मारीचका मारा जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 652, 653
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।